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पोस्ट-डेटेड चेक: कब जमा करें और हिसाब कैसे रखें
पोस्ट-डेटेड चेक (PDC) पर आगे की तारीख होती है। ग्राहक उधार पर माल लेने के लिए PDC देते हैं; आप भी सप्लायर या मकान मालिक को दे सकते हैं। PDC तभी काम का है जब कोई उसे समय पर जमा करना याद रखे और उस दिन खाते में पैसा हो।
नियम संक्षेप में
- PDC उस पर लिखी तारीख या उसके बाद ही जमा हो सकता है, पहले नहीं। पहले पेश किया चेक बैंक लौटा देता है।
- हर चेक की तरह यह उस पर लिखी तारीख से तीन महीने मान्य रहता है। उसके बाद यह पुराना (stale) हो जाता है और बैंक पैसा नहीं देता।
- क्लियर होने तक यह पैसा नहीं है। आपके खातों में बिल चेक से चुका दिखता है, पर कैश और बैंक बैलेंस में यह नहीं जुड़ता।
- PDC पैसे की कमी से बाउंस हो तो किसी भी चेक की तरह धारा 138 के वही नियम लागू होते हैं।
यहां PDC कैसे लिखें
"चेक मिला" (या "चेक दिया") में चेक पर लिखी तारीख चेक की तारीख में डालें। रजिस्टर उसे पोस्ट-डेटेड मार्क करता है, "पोस्ट-डेटेड" टाइल में गिनता है, और उसकी तारीख से एक हफ्ता पहले "अगले 7 दिन में आने वाले चेक" में दिखाता है। उस दिन जमा करें और जमा किया दबाएं; बैंक में पैसा आ जाए तो क्लियर दबाएं।
एक उदाहरण
एक बिल्डर 5 नवंबर को ₹1,80,000 का माल लेता है और 20 नवंबर, 20 दिसंबर और 20 जनवरी की तारीख के ₹60,000 के तीन PDC देता है। तीनों 5 नवंबर को उसी बिल के सामने लिखे जाते हैं। बिल चेकों से चुका दिखता है, बकाया ₹0 है, और "पोस्ट-डेटेड" टाइल 3 दिखाती है। हर चेक अपनी तारीख से पहले 7 दिन वाली लिस्ट में आता है। अगर दिसंबर वाला चेक बाउंस हो, तो बिल के ₹60,000 फिर बकाया हो जाते हैं।
PDC देना
- हर दिया PDC उसी दिन "चेक दिया" में लिखें, ताकि उसकी तारीख 7 दिन वाली लिस्ट में आए।
- चेक की तारीख से क्लियर होने तक खाते में पैसा रखें; सप्लायर तीन महीने में किसी भी दिन उसे पेश कर सकता है।
- एक दिन में एक व्यक्ति को ₹10,000 से ज़्यादा का पेमेंट अकाउंट पेयी चेक, ड्राफ्ट या बैंक ट्रांसफर से करें, वरना इनकम टैक्स में खर्च नहीं माना जा सकता। बेयरर चेक नकद माना जाता है, इसलिए चेक पर "A/c Payee" लिखें।