Nivesh Sahayak ChequesFree cheque register: cheques received and given, post-dated cheques and bounces

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चेक रजिस्टर फॉर्मेट: हर चेक के लिए क्या लिखें

चेक पैसे का वादा है, पैसा नहीं। चेक रजिस्टर इन वादों की लिस्ट है, दोनों तरफ के, जब तक हर चेक क्लियर या बाउंस न हो जाए। इससे दो आम दिक्कतें रुकती हैं: दराज़ में भूला हुआ पोस्ट-डेटेड चेक, और आपका अपना चेक इसलिए बाउंस होना कि जिस दिन वह पहुंचा उस दिन खाते में पैसा कम था।

कॉलम

  1. चेक की तारीख: चेक पर लिखी तारीख। पोस्ट-डेटेड चेक में यह चेक मिलने के दिन से बाद की होती है।
  2. चेक नं. (छह अंक) और चेक का बैंक।
  3. पार्टी: चेक देने वाला ग्राहक, या वह सप्लायर जिसे आपने दिया।
  4. मिला या दिया, और रकम।
  5. स्थिति: मिला, जमा नहीं किया; जमा किया, क्लियर नहीं; दिया, क्लियर नहीं; क्लियर (तारीख के साथ); बाउंस (तारीख के साथ)।
  6. वे बिल जिनका यह पैसा है, ताकि पार्टी का बैलेंस सही रहे।

एक हफ्ते का उदाहरण

चेक की तारीखचेक नं.पार्टीरकम (₹)स्थिति
02 Nov 2026004512शर्मा ट्रेडर्स (मिला)+25,000.00क्लियर 03 Nov
04 Nov 2026000187गुप्ता स्टील (दिया)−40,000.00दिया, क्लियर नहीं
06 Nov 2026118230कौर हार्डवेयर (मिला)+12,600.00बाउंस 07 Nov
20 Nov 2026553901सिंह बिल्डर्स (मिला)+60,000.00मिला, जमा नहीं किया (पोस्ट-डेटेड)

इन चेकों से बैंक में पैसा सिर्फ ₹25,000 है। गुप्ता स्टील का चेक किसी भी दिन आपके खाते में आ सकता है, इसलिए ₹40,000 वहां होने चाहिए। कौर हार्डवेयर का बिल फिर बकाया है। सिंह बिल्डर्स का चेक 20 नवंबर से पहले जमा नहीं हो सकता।

सही रखने की आदतें

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